मंगल की एक अप्रत्याशित चट्टान में पानी के तीन दौर दर्ज हैं
जेजेरो की प्राचीन झील के किनारे पर्सिवरेंस को मैग्मा से बनी चट्टान मिली। उसकी दरारें पानी से हुए बदलाव के तीन चरण दर्ज करती हैं और प्राचीन संरक्षित परिवेश की खोज को झील की तलछट से आगे ले जाती हैं।

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यह खोज मंगल के निवास-योग्य अतीत की तलाश का दायरा बदलती है। जेजेरो क्रेटर के भीतरी किनारे से लगी भूवैज्ञानिक पट्टी ‘मार्जिन इकाई’ में पर्सिवरेंस रोवर को आग्नेय चट्टान मिली, जो मैग्मा के ठंडा होने से बनती है; यहां पानी से परतों में जमा तलछट मिलने की उम्मीद थी। पाठकों के लिए नई बात यह है कि प्राचीन झील का किनारा केवल सतही जमाव नहीं, बल्कि चट्टान की दरारों में हुई भूमिगत प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड भी संजोए है।
पहला संकेत चट्टान की बनावट में था। यात्रा के ऊंचे हिस्सों में मोटे कण और ओलिविन के क्रिस्टल—मैग्नीशियम और लोहे से भरपूर ऐसा खनिज जो पानी से प्रतिक्रिया करता है—बताते हैं कि मैग्मा भूमिगत धीरे-धीरे ठंडा हुआ। वहां परिवर्तन कम था, यानी तरल के गुजरने से होने वाला रासायनिक और खनिज बदलाव सीमित था; निचली ऊंचाइयों पर दरारों, उभरी धारियों और शिराओं में लगातार हुए बदलाव दर्ज थे।
इस इतिहास का क्रम तय करने के लिए टीम ने लगभग 265 मीटर के ऊंचाई-अंतर में 185 से अधिक लक्ष्यों का विश्लेषण किया। पर्सिवरेंस के मस्तूल पर लगा सुपरकैम 6,5 मीटर तक दूर बिंदुओं पर लेजर दागता है; स्पंद सतह की बहुत थोड़ी मात्रा को वाष्पित करता है और उससे निकली रोशनी मौजूद तत्वों की पहचान कराती है। संरचना, बनावट, ऊंचाई और एक-दूसरे को काटती शिराओं के संबंधों ने वह अवलोकन दिए, जिनसे शोधकर्ताओं ने घटनाओं का क्रम दोबारा बनाया।
टीम के अनुसार पहला दौर तब शुरू हुआ, जब कार्बन डाइऑक्साइड से भरपूर भूमिगत पानी दरारों से गुजरा। तटस्थ या क्षारीय इस पानी ने ओलिविन से प्रतिक्रिया करके कार्बोनेट बनाए—ऐसे खनिज जो पानी, कार्बन और चट्टान के बीच कुछ प्रतिक्रियाओं में बनते हैं और परिवेश की रासायनिक स्थितियां दर्ज करते हैं। ये भराव अपरदन को बेहतर ढंग से झेल सके, इसलिए उनमें से कुछ आज छोटी उभरी धारियों के रूप में दिखाई देते हैं।
इसके बाद कम pH वाला घोल—यानी अम्लता और क्षारीयता मापने वाले पैमाने पर नीचे—उन्हीं दरारों और चट्टानों से गुजरा। अध्ययन की पुनर्रचना के अनुसार, उसने कार्बोनेट का कुछ हिस्सा घोलकर दूसरी जगह पहुंचाया, रंध्र खोले और सिलिका के जमाव को बढ़ावा दिया। सिलिका सिलिकॉन और ऑक्सीजन से बनी सामग्री है, जो चट्टान की खाली जगह भर सकती है। पानी प्राचीन झील से आया हो सकता है या ठंडे भूमिगत परिसंचरण से; आंकड़े दोनों स्रोतों को संभावनाओं के रूप में बनाए रखते हैं।
तीसरे दौर ने अधिक नई दरारों में निशान छोड़े। भूमिगत गर्म हुए पानी—यही हाइड्रोथर्मल परिसंचरण का सीधा अर्थ है—ने कैल्शियम सल्फेट और फ्लोराइट वाली शिराएं जमा कीं। कैल्शियम और फ्लोरीन से बना फ्लोराइट ज्वालामुखीय चट्टान में गर्म परिसंचरण के बाद के चरण का संकेत देता है। पूर्वी हिस्से के एक स्थान पर करीब 25 सेंटीमीटर की एक शिरा देखी गई; बाकी इकाई में उसका विस्तार अभी स्थापित नहीं हुआ है।
यह क्रम मार्जिन इकाई की व्याख्या बदलता है। कार्बोनेट का कुछ हिस्सा झील की तलहटी में तलछट के रूप में जमा नहीं हुआ; वह मैग्मा से बनी चट्टान के भीतर तब बना, जब अलग-अलग संरचना और तापमान वाले तरल दरारों से गुजरे। खनिज और शिराओं के परस्पर काटने के संबंध प्रत्यक्ष अवलोकन हैं; टीम इसी रिकॉर्ड से पानी से जुड़े कम से कम तीन दौर का निष्कर्ष निकालती और दूसरे चरण के संभावित स्रोत प्रस्तावित करती है।
यह रिकॉर्ड खगोलजीवविज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, जो ब्रह्मांड में जीवन की संभावित परिस्थितियों और संकेतों का अध्ययन करता है। पृथ्वी पर पानी और ओलिविन की प्रतिक्रिया हाइड्रोजन छोड़ सकती है, जो कुछ सूक्ष्मजीवों के लिए ऊर्जा स्रोत है; वहीं कार्बोनेट और सिलिका रासायनिक संकेत सुरक्षित रख सकते हैं। जेजेरो में ये गुण संरक्षण की संभावना वाले प्राचीन परिवेश चुनने में मदद करते हैं; मिले खनिज जीवन का प्रमाण नहीं हैं।
अध्ययन 21 सितंबर 2026 को Communications Earth & Environment में प्रकाशित हुआ। यह सापेक्ष क्रम स्थापित करता है—कौन-सा बदलाव पहले या बाद में हुआ—लेकिन हर चरण की आयु या अवधि निर्धारित नहीं करता। नतीजा केवल इस सामान्य निष्कर्ष से आगे जाता है कि मंगल पर कभी पानी था: मार्जिन इकाई की दरारदार आग्नेय चट्टान में कम से कम तीन अलग भूमिगत जलीय दौरों के प्रमाण संरक्षित हैं।
मुख्य बिंदु
- मार्जिन इकाई में ओलिविन से भरपूर आग्नेय चट्टान है, जबकि प्राचीन झील के पास उसकी स्थिति के कारण तलछट मिलने की उम्मीद थी।
- टीम ने तीन चरणों का क्रम बनाया: कार्बोनेट का निर्माण, सिलिका के जमाव के साथ कार्बोनेट का पुनर्स्थानांतरण, और कैल्शियम सल्फेट व फ्लोराइट वाला गर्म परिसंचरण।
- यह क्रम खगोलजीवविज्ञान के लिए महत्वपूर्ण परिवेशों का दायरा बढ़ाता है, लेकिन इसकी आयु या अवधि तय नहीं है और यह जीवन का प्रमाण नहीं है।

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