मानव ऑर्गेनॉइड ने नए चूहे मॉडल में कॉर्टिकल स्थान भरा
मानव कोशिकाओं से बने ऊतक ने घटे हुए कॉर्टेक्स से बनी खाली जगह भरी, तंत्रिका तंत्र से जुड़ा और ऑक्सीजन की कमी पर प्रतिक्रिया दी; यह मॉडल न मानव मस्तिष्क है, न उसके सामान्य विकास की प्रतिकृति।

Leitura autorizada · 3 crédito(s) restante(s)
शोधकर्ताओं ने चूहे के भीतर मानव मस्तिष्क नहीं बनाया। उन्होंने ऐसे आनुवंशिक रूप से बदले चूहे तैयार किए जिनमें नियोकॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस का अधिकांश भाग नहीं था—ये क्षेत्र अनुभूति, गति और स्मृति से जुड़े हैं—और जन्म के तुरंत बाद उस खाली जगह में मानव कोशिकाओं से बने कॉर्टिकल ऑर्गेनॉइड प्रत्यारोपित किए।
ऑर्गेनॉइड प्रेरित बहुशक्तिशाली स्टेम कोशिकाओं से प्रयोगशाला में उगाए गए त्रि-आयामी ऊतक होते हैं। वे कॉर्टेक्स की कुछ कोशिका किस्मों और शुरुआती संगठन को दोहराते हैं, पर छोटे मस्तिष्क नहीं होते। ज़ेनोकॉर्टिकेशन नाम के इस मॉडल में मानव ऊतक को मेज़बान से रक्त वाहिकाएँ मिलीं और वह पशु के बाकी तंत्रिका तंत्र के संपर्क में बढ़ा।
प्रत्यारोपित 29 चूहों में 86.2% में ग्राफ्ट सफल रहा। 14 पशुओं में दूसरे से तीसरे महीने के बीच ग्राफ्ट का आयतन 4.7 गुना हुआ। तीन महीने पर सात चूहों में मानव ऊतक संयुक्त कॉर्टिकल ऊतक के 91.9% के बराबर था—अर्थात चूहे के बचे कॉर्टेक्स और ग्राफ्ट का योग—पूरे मस्तिष्क का 91.9% नहीं।
मानव न्यूरॉनों ने चूहे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के क्षेत्रों तक प्रक्षेप भेजे और स्वतःस्फूर्त, संगठित विद्युत गतिविधि दिखाई। फिर भी ऊतक की परिपक्वता मानव गर्भावस्था के मध्य चरण के कॉर्टेक्स जैसी रही और उसने सामान्य कॉर्टेक्स की मानक परतें लगातार नहीं बनाईं। इसलिए एकीकरण मानव मस्तिष्क की संरचना के पुनर्निर्माण के बराबर नहीं है।
व्यवहार परीक्षणों में ग्राफ्ट वाले पशुओं की सामान्य चलने-फिरने की क्षमता काफी हद तक बनी रही, लेकिन अंग समन्वय और कुछ कार्यों में चुनिंदा अंतर मिले। अध्ययन मानव जैसी संज्ञान क्षमता या चेतना नहीं दिखाता। एक अन्य परीक्षण में पाँच घंटे कम ऑक्सीजन ने ग्राफ्ट की मानव कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाया और उसके बाद चाल में बदलाव आया; इससे मॉडल मानव कॉर्टिकल ऊतक की संवेदनशीलता जाँचने का साधन बन सकता है, उपचार की घोषणा नहीं।
टीम को ऐसी कोशिकाएँ भी मिलीं जिनके आणविक और आकारगत लक्षण वॉन इकोनोमो प्रकार के न्यूरॉनों से मेल खाते थे; मानव मस्तिष्क में ये सामाजिक और भावनात्मक एकीकरण के परिपथों से जुड़े हैं। यह संकेतक पहचान है, इस बात का प्रमाण नहीं कि ग्राफ्ट ने वे परिपथ बना लिए। प्रयोग स्टेम-सेल और पशु-उपयोग नैतिक निगरानी में हुआ; लेखक भी भविष्य के अध्ययनों में कल्याण, परिपक्वता और उभर सकने वाली क्षमताओं की करीबी निगरानी की सलाह देते हैं।
मुख्य बिंदु
- तीन महीने पर सात चूहों में मानव ऑर्गेनॉइड संयुक्त कॉर्टिकल ऊतक का 91.9% थे, पूरे मस्तिष्क का 91.9% नहीं।
- मानव कोशिकाएँ तंत्रिका तंत्र से जुड़ीं और कम ऑक्सीजन पर प्रतिक्रिया दीं; यह प्रयोगात्मक मंच है, उपचार नहीं।
- ऊतक अपरिपक्व रहा और पूर्ण कॉर्टिकल संरचना नहीं बनी; अध्ययन मानव संज्ञान या चेतना नहीं दिखाता।

टिप्पणियाँ
अभी कोई प्रकाशित टिप्पणी नहीं है।
टिप्पणी के लिए सदस्यता खाते से प्रवेश करें।