जेज़ेरो की चट्टानों में पानी के असर के कम से कम तीन चरण दर्ज
पर्सिवियरेंस के विश्लेषण क्रेटर के अंदरूनी किनारे पर हुए रासायनिक बदलावों का क्रम बनाते हैं। इनमें भूजल और संभवतः प्राचीन झील की भूमिका दिखती है, लेकिन घटनाओं की उम्र तय नहीं होती।

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मंगल के जेज़ेरो क्रेटर की प्राचीन झील के किनारे की चट्टानें किसी एक जलराशि के गुज़रने से कहीं अधिक जटिल इतिहास सँजोए हैं। 21 सितंबर को कम्युनिकेशंस अर्थ ऐंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित अध्ययन, मार्जिन यूनिट कहलाने वाले क्षेत्र में तरल पदार्थों से हुए बदलावों के कम से कम तीन चरण पहचानता है। खनिजों और दरारों के बीच संबंध प्रक्रियाओं का क्रम बताते हैं, लेकिन यह नहीं कि हर प्रक्रिया कब हुई।
पर्ड्यू विश्वविद्यालय की कैंडिस बेडफोर्ड के नेतृत्व वाली टीम ने पर्सिवियरेंस रोवर के सुपरकैम उपकरण से मिली तस्वीरें, रासायनिक माप और खनिज संबंधी जानकारी जोड़ी। इसकी एक क्षमता चट्टान पर लेज़र दागना है: गर्म हुए पदार्थ से निकलने वाला प्रकाश बताता है कि उसमें कौन से तत्व हैं। दूसरे अवलोकन परावर्तित प्रकाश और कणों की बनावट दर्ज करते हैं। पूरी इकाई में 185 से अधिक चट्टानी लक्ष्यों का विश्लेषण हुआ। ये अवलोकन-स्थल हैं, पृथ्वी पर लाए गए 185 नमूने नहीं।
अलग-अलग ऊँचाइयों वाले भूभागों की तुलना निर्णायक रही। ऊँचे हिस्सों में मैग्नीशियम और लोहे से भरपूर खनिज ओलिवीन के क्रिस्टलीय कणों का आपस में जुड़ाव और आकार पिघले पदार्थ के धीरे ठंडा होने के अनुरूप है। बाद में पानी ने उन्हें अपेक्षाकृत कम बदला। निचले हिस्सों में टूटे कण, कार्बोनेट और कणों के बीच सिलिका दिखाई देते हैं। इकाई का आग्नेय उद्गम कुछ क्षेत्रों में तलछटी पुनर्विन्यास को नकारता नहीं: पानी और अपरदन पहले बन चुके पदार्थ को फिर से फैला सकते थे।
पुनर्निर्मित पहले चरण में कार्बन डाइऑक्साइड से भरपूर तरल चट्टान में घूमे और दरारों में कार्बोनेट बनने में सहायक हुए। इस खनिज भराव ने आसपास की चट्टान से बेहतर अपरदन झेला, जिससे आज दिखाई देने वाली उभरी धारियाँ बचीं। बाद में दूसरे तरलों ने पहले से मौजूद कार्बोनेट बदले, खाली जगहें बनाईं और सिलिका जमा की। यह दूसरा चरण प्राचीन झील या भूजल के रासायनिक विकास से जुड़ा हो सकता है। बदलावों का स्थानिक वितरण इन संभावनाओं को परखने में मदद करता है, लेकिन अकेले यह तय नहीं करता कि कौन सी प्रमुख थी।
देर के चरण ने कैल्शियम सल्फेट और फ्लोराइट वाली खनिज शिराएँ छोड़ीं। फ्लोराइट में कैल्शियम और फ्लोरीन होते हैं। अध्ययन स्थल पर मोटी शिरा में फ्लोराइट और भूवैज्ञानिक संदर्भ, भूमिगत गर्म पानी के संचार के अनुकूल हैं। यह संयुक्त साक्ष्यों की व्याख्या है, रोवर द्वारा मापा गया तापमान नहीं, और न ही कोई ऐसी अकेली विशेषता जो गर्म पानी की उपस्थिति सिद्ध कर दे। लेख स्वयं बताता है कि फ्लोराइट ठंडी परिस्थितियों में भी बन सकता है।
यह पुनर्निर्माण स्थानीय जीवन-समर्थक परिस्थितियों के बारे में सवाल बदलता है। केवल झील के किनारे के निशान खोजने के बजाय भूमिगत वातावरण और पानी-चट्टान की क्रमिक अभिक्रियाएँ समझनी होंगी। कार्बोनेट और सिलिका प्राचीन प्रक्रियाओं के संकेत, जिनमें संभावित जैविक गतिविधि भी शामिल है, सहेज सकते हैं; लेकिन अध्ययन जीवन की पहचान नहीं करता। वह इन चट्टानों और पर्सिवियरेंस द्वारा जुटाए नमूनों की व्याख्या के लिए भूवैज्ञानिक क्रम देता है, जबकि पानी वाले चरणों की निश्चित तिथियाँ अभी उपलब्ध नहीं हैं।
मुख्य बिंदु
- सुपरकैम ने संरचना, बनावट और ऊँचाई का संबंध जानने के लिए 185 से अधिक चट्टानी लक्ष्य जाँचे।
- क्रम में दरारों के कार्बोनेट, सिलिका वाले बदलाव और सल्फेट-फ्लोराइट की बाद की शिराएँ शामिल हैं।
- अध्ययन ने झील की भूमिका, घटनाओं की उम्र या जीवन का अस्तित्व स्थापित नहीं किया।

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