चंद्र नमूनों में पहली बार मिला लोहे का रूप दिखाता है चुंबकीय भंवर
Chang’e-6 मिशन के टक्कर से बने काँच के दो टुकड़ों में धात्विक लोहे का ऐसा रूप मिला जो प्राकृतिक चंद्र नमूनों में पहले पहचाना नहीं गया था। बड़े कणों में चुंबकीय भंवर दिखा; अकेली यह खोज चंद्रमा के प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र का पुनर्निर्माण नहीं करती।

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पृथ्वी की तरह चंद्रमा का अब कोई वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है, पर उसकी सामग्री में पुराने चुंबकत्व के संकेत बचे हो सकते हैं। Chang’e-6 मिशन से लौटे टक्कर-जनित काँच के दो टुकड़ों में Pengfei Liu, Haifeng Du और सहकर्मियों ने प्राकृतिक चंद्र नमूनों में पहली बार धात्विक लोहे का एक रूप पहचाना, जिसे गामा लोहा कहते हैं। इस रूप के अपेक्षाकृत बड़े कणों में चुंबकीय भंवर मिला: चुंबकत्व की दिशा एक केंद्र के चारों ओर मुड़ती है। अध्ययन Proceedings of the National Academy of Sciences में छपा; Chinese Academy of Sciences ने इसकी संस्थागत खबर दी, जिसमें किसी व्यक्तिगत रिपोर्टर का नाम नहीं था।
सरल शब्दों में, एक टक्कर ने सतह की सामग्री को गरम करके पिघलाया; ठंडा होने पर लोहे के दानों को भीतर फँसाए काँच के छोटे टुकड़े बने। दल ने ऐसे दो टुकड़ों से सूक्ष्म नमूने निकाले और उनकी संरचना, रासायनिक बनावट और चुंबकत्व जाँचा। काँच टक्कर की प्रक्रिया का प्रमाण सँजोता है, पूरे चंद्र चुंबकीय क्षेत्र का पहले से दिनांकित, तैयार रिकॉर्ड नहीं।
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से—जो सामान्य प्रकाश की अपेक्षा छोटे विवरण दिखाने के लिए इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करता है—शोधकर्ताओं को नैनोमीटर आकार के कई लौह कण मिले। एक नैनोमीटर मीटर का एक अरबवाँ भाग है। कुछ कणों की संरचना फलकों पर केंद्रित घनाकार थी: कल्पना करें कि परमाणु घन के कोनों और हर फलक के बीच में बैठे हैं। यही गामा लोहे, या γ-Fe, का विन्यास है; यह चंद्र मिट्टी में अधिक सामान्य अल्फा रूप से अलग है।
चुंबकीय व्यवस्था देखने के लिए दल ने इलेक्ट्रॉन होलोग्राफी अपनाई, जो चुंबकीय क्षेत्र से इलेक्ट्रॉनों के मुड़ने के आधार पर उस क्षेत्र की बनावट पुनर्निर्मित करती है। बड़े गामा-लौह कणों में चुंबकत्व की दिशा केंद्र के चारों ओर मुड़कर भंवर बनाती थी; बाहरी चुंबकीय क्षेत्र लगाने पर उनकी प्रतिक्रिया भी स्थिर रही। इससे पता चलता है कि सामग्री चुंबकीय सूचना सँजो सकती है, लेकिन केवल इससे यह नहीं मालूम होता कि हर दाना बनते समय कौन-सा क्षेत्र मौजूद था।
लेखकों का प्रस्ताव है कि टक्कर के बाद बहुत तेज़ ठंडा होने, अन्य तत्वों की बहुत छोटी मात्रा और आसपास के काँच के आवरण ने गामा लोहे के इस रूप को संरक्षित रखने में मदद की होगी, जबकि यह सामान्यतः ठंड में स्थिर नहीं रहता। खोज उन खनिजों की सूची बढ़ाती है जिन्हें चंद्रमा के चुंबकीय अतीत को पढ़ते समय देखना चाहिए। यह चुंबकीय रिकॉर्ड के एक संभावित नए वाहक के विचार को समर्थन देती है, प्राचीन चंद्र क्षेत्र की तैयार समयरेखा नहीं। अधिक टुकड़े जाँचना और टक्कर से बने चुंबकत्व को आसपास के क्षेत्र से आए चुंबकत्व से अलग करना निर्णायक होगा।
मुख्य बिंदु
- Chang’e-6 के टक्कर-जनित काँच के दो टुकड़ों में गामा लोहा मिला; प्राकृतिक चंद्र नमूनों में इस रूप की यह पहली पहचान है।
- बड़े कणों में इलेक्ट्रॉन होलोग्राफी से चुंबकीय भंवर देखा गया।
- सामग्री चुंबकत्व दर्ज कर सकती है, पर दो टुकड़ों से चंद्रमा का प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र पुनर्निर्मित नहीं होता।

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