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क्या शाश्वत पुनरावृत्ति ब्रह्मांडीय सिद्धांत हो सकती है?

नीत्शे के विचार-प्रयोग और चक्रीय भौतिकी के बीच वैध पुल है, पर दोनों समान नहीं।

Modelo científico ilustrado de um universo com contração e expansão
चित्र: Max Planck Institute for Gravitational Physics / AEI
SUPER SCI-Z संपादकीय विश्लेषण

नीत्शे की शाश्वत पुनरावृत्ति मुख्यतः अस्तित्वगत परीक्षा है: क्या हम यही जीवन फिर जिएँगे? इसे भौतिकी बनाने के लिए मूल्य के प्रश्न को ज्यामिति, एंट्रॉपी, पदार्थ और ब्रह्मांडीय विकास की परीक्षणीय शर्तों में बदलना होगा।

अनंत समय और सीमित अवस्थाएँ पुनरावृत्ति का संकेत दे सकती हैं, पर गारंटी नहीं। अवस्था-स्थान सतत हो सकता है; त्वरित विस्तार वापसी रोक सकता है; एंट्रॉपी समय की दिशा देती है; और लगभग समान अवस्था वही इतिहास नहीं बनाती।

बाउंस ब्रह्मांड, चक्रीय मॉडल और पुनरावृत्ति प्रमेय इस विचार को विशेष मान्यताओं पर वैज्ञानिक रूप देते हैं। फिर भी आज कोई अवलोकन ब्रह्मांडीय इतिहास के दोहराव को सिद्ध नहीं करता।

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मुख्य बिंदु

  • दार्शनिक पुनरावृत्ति मूल्यगत प्रयोग है।
  • अनंत समय अकेले पुनरावृत्ति सुनिश्चित नहीं करता।
  • चक्रीय मॉडल वैज्ञानिक हैं, पर समान इतिहास के लौटने का प्रमाण नहीं।
मुख्य स्रोतDossiê autoral — eterno retorno e cosmologias cíclicas