चार से 36 तक: ओसीडी और टिक विकारों को जोड़ता आनुवंशिक मानचित्र
इन स्थितियों पर अब तक के सबसे बड़े एक्सोम-अनुक्रमण अध्ययन में 3% से 8% प्रभावित प्रतिभागियों में दुर्लभ, बड़े प्रभाव वाले परिवर्तन मिले और उच्च-विश्वसनीयता वाले जीनों की सूची लगभग दस गुना बढ़ी।

पहले केवल चार उच्च-विश्वसनीयता वाले जीन ज्ञात थे, इसलिए यह समझाना कठिन था कि ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर और दीर्घकालिक टिक विकार अक्सर एक ही व्यक्ति या परिवार में क्यों दिखाई देते हैं। 1 सितंबर को Nature Neuroscience में प्रकाशित अध्ययन ने यह संख्या 36 कर दी। इसका अर्थ कोई एक “ओसीडी जीन” या “टूरेट जीन” मिल जाना नहीं है; शोध ने दुर्लभ परिवर्तनों का ऐसा समूह पहचाना है जो आदत, गति और आवेग-नियंत्रण से जुड़े मस्तिष्क परिपथों पर एकत्र होता है।
Belinda Wang के नेतृत्व वाली टीम ने ओसीडी, दीर्घकालिक टिक विकार या दोनों से प्रभावित 3,964 लोगों के एक्सोम का विश्लेषण किया। एक्सोम डीएनए का वह भाग है जिसमें प्रोटीन बनाने के निर्देश होते हैं। आँकड़ों में प्रभावित व्यक्ति और उसके माता-पिता वाले 2,418 त्रय तथा अलग-अलग विश्लेषित 1,546 प्रतिभागी शामिल थे। तुलना के लिए न्यूरोटिपिकल भाई-बहनों और उनके माता-पिता के 1,734 त्रय तथा एकल मामलों के विश्लेषण में यूरोपीय वंश के 2,380 माता-पिता नियंत्रण लिए गए।
शोधकर्ताओं ने ऐसे नए उत्परिवर्तन खोजे जो प्रतिभागी में थे लेकिन माता-पिता में नहीं, साथ ही ऐसे अत्यंत दुर्लभ परिवर्तन जो प्रोटीन को नुकसान पहुँचा सकते थे। उन्हें ओसीडी के लिए 12, टिक विकारों के लिए दस और दोनों स्थितियों को साथ देखने पर 34 उच्च-विश्वसनीयता जीन मिले। परस्पर दोहराती सूचियों को मिलाने पर कुल 36 जीन बने, जिनकी मिथ्या-खोज दर 10% से कम थी। 36 में से 30 जीनों के संबंध के प्रमाण में दोनों निदान समूहों के लोगों का योगदान था।
अध्ययन में जाँचे गए रोगकारी परिवर्तन लगभग 3% से 8% प्रभावित प्रतिभागियों में पाए गए। वाहकों में इन जीनों से जुड़ा औसत ऑड्स अनुपात 57 था, जो मनोरोग आनुवंशिकी में बड़ा प्रभाव है। ऑड्स अनुपात समूहों के बीच सापेक्ष संभावना बताता है; वह निदान को अनिवार्य नहीं बनाता। ओसीडी या टिक विकार वाले अधिकांश लोगों में ये परिवर्तन नहीं थे, और सामान्य आनुवंशिक विविधता, पर्यावरण तथा विकास भी जोखिम को प्रभावित करते हैं।
जीन-सक्रियता विश्लेषण ने जन्म से पहले और बाद की मस्तिष्क प्रांतस्था, स्ट्रायटम और जन्मोत्तर सेरिबेलम में अधिक अभिव्यक्ति दिखाई। चार जीन उन क्षेत्रों से भी मिले जिन्हें सामान्य आनुवंशिक परिवर्तनों के अध्ययनों ने ओसीडी से जोड़ा था। इस समूह का ऑटिज्म, स्किज़ोफ्रेनिया और विकासात्मक विलंब या बौद्धिक अक्षमता से जुड़े जीनों से मेल था, पर तुलना के लिए लिए गए जन्मजात हृदय रोग के जीनों से नहीं। यह साझा जीवविज्ञान सुझाता है, निदानों की समानता नहीं।
यह परिणाम प्रयोगों के लिए मानचित्र है, तैयार उपचार नहीं। अध्ययन ने दुर्लभ प्रोटीन-कोडिंग परिवर्तन और छोटे जोड़ या विलोपन देखे, लेकिन नियामक व माइटोकॉन्ड्रियल परिवर्तन तथा बड़े कॉपी-नंबर बदलाव शामिल नहीं किए। नमूने का एक भाग पहले के शोध में प्रयुक्त हो चुका था, इसलिए पूरी तरह स्वतंत्र पुनरावृत्ति नहीं की गई। अब 36 जीन अधिक विशिष्ट कोशिकीय और पशु मॉडल बनाने देते हैं; अगला काम यह तय करना है कि कौन-से परिवर्तन परिपथ बदलते हैं और किन तंत्रों को सुरक्षित रूप से लक्षित किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
- ओसीडी और दीर्घकालिक टिक विकारों से जुड़े उच्च-विश्वसनीयता जीनों की सूची चार से बढ़कर 36 हुई।
- दुर्लभ परिवर्तन लगभग 3% से 8% प्रभावित प्रतिभागियों में मिले और वाहकों में औसत ऑड्स अनुपात 57 था।
- ये जीन मस्तिष्क तंत्रों पर नए प्रयोगों का आधार हैं, तत्काल निदान परीक्षण या उपचार नहीं।

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