इन्फ्लुएंसर की विश्वसनीयता खरीद पर असर डालती है, पर अकेले नहीं
हंगरी के 506 वयस्कों के सर्वेक्षण में भरोसा, भावनात्मक जुड़ाव और सोशल मीडिया उपयोग को स्वास्थ्य-संबंधी उत्पाद खरीदने की मंशा से जुड़ा पाया गया।

किस वजह से कोई डिजिटल सिफारिश स्क्रीन पार करके खरीदारी की टोकरी तक पहुँचती है? Erzsébet Buglyó-Nyakas, Sándor Kovács और Tímea Gál ने हंगरी के उपभोक्ताओं में इस प्रश्न की जाँच की, खासकर उन उत्पादों और विकल्पों पर जिन्हें स्वास्थ्य से जुड़ा बताया जाता है। उन्होंने केवल फॉलोअर नहीं गिने, बल्कि देखा कि सोशल मीडिया उपयोग, मानी गई विश्वसनीयता, भरोसा और भावनात्मक जुड़ाव निर्णय में कैसे एक साथ आते हैं।
शोधकर्ताओं ने 2025 की शुरुआत में 18 से 65 वर्ष के 506 लोगों से ऑनलाइन प्रश्नावली भरवाई। नमूने को लिंग, आयु और बस्ती के प्रकार के आधार पर हंगरी का प्रतिनिधित्व करने के लिए व्यवस्थित किया गया। उत्तरों पर पुष्टिकारी कारक विश्लेषण किया गया, जो जाँचता है कि प्रश्नों के समूह अपेक्षित अवधारणाएँ बनाते हैं या नहीं। फिर एक पदानुक्रमित मॉडल में इन अवधारणाओं को जोड़कर सोशल मीडिया उपयोग, इन्फ्लुएंसर को दिए गए गुणों और खरीद व्यवहार की सापेक्ष भूमिका की तुलना की गई।
मॉडल में सोशल मीडिया उपयोग और क्रिएटर का महसूस किया गया प्रभाव, दोनों खरीद व्यवहार से सकारात्मक रूप से जुड़े थे। जाँचे गए घटकों में इन्फ्लुएंसर की विश्वसनीयता सबसे मजबूत थी: अधिक मानी गई विश्वसनीयता अधिक भरोसे, भावनात्मक जुड़ाव और खरीद की मंशा से जुड़ी थी। अध्ययन ने उत्तर केवल एक समय-बिंदु पर लिए, इसलिए ये सांख्यिकीय संबंध यह साबित नहीं करते कि विश्वसनीयता ने खरीद कराई।
समूहों के अंतर ने परिणाम को और स्पष्ट किया। कम उम्र, कम शिक्षा और अधिक लचीले कामकाजी समय वाले प्रतिभागी डिजिटल सिफारिशों के प्रति अधिक ग्रहणशील थे। उपयोगकर्ताओं के बीच साझा टिप्पणियों और सिफारिशों वाला इलेक्ट्रॉनिक वर्ड-ऑफ-माउथ तथा Instagram, उत्तरदाताओं में TikTok से अधिक प्रभावशाली दिखे। यानी हर क्रिएटर का हर दर्शक पर एक जैसा प्रभाव नहीं मिला।
Vogue Business की उद्योग आँकड़ों और साक्षात्कारों पर आधारित रिपोर्ट इसी से जुड़ा बाजार परिवर्तन बताती है: ब्रांड कच्ची फॉलोअर संख्या को कम और सहभागिता की गुणवत्ता, क्रिएटर-समुदाय के मेल तथा भरोसे को अधिक महत्व दे रहे हैं। अलग व्यावसायिक व्यवहार और आबादी देखने के कारण वह रिपोर्ट हंगरी के अध्ययन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है; वह दिखाती है कि शोध में मापा गया प्रश्न आज के विपणन निर्णयों को भी आकार दे रहा है।
आँकड़े एक तृतीय-पक्ष शोध पैनल के माध्यम से जुटाए गए। प्रश्नावली खोलने से पहले हर प्रतिभागी को उद्देश्य, स्वैच्छिक भागीदारी, गुमनामी और डेटा सुरक्षा की जानकारी दी गई और इलेक्ट्रॉनिक सहमति ली गई; लेखकों के अनुसार नाम या ईमेल पते एकत्र नहीं किए गए। यह प्रक्रिया व्यक्तिगत डेटा के जोखिम को घटाती है, पर माप की प्रकृति नहीं बदलती: अध्ययन सोशल मीडिया उपयोग, भरोसे और मंशा पर लोगों के अपने कथन दर्ज करता है, बैंक रिकॉर्ड, दुकानों या प्लेटफॉर्म पर देखी गई खरीद नहीं।
सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि पहुँच और लोकप्रियता अकेले व्यावसायिक प्रभाव नहीं समझातीं। हंगरी के नमूने में सिफारिश तब अधिक प्रभावी थी जब दर्शकों ने क्रिएटर को भरोसेमंद और सामाजिक रूप से निकट माना। कंपनियों और स्वास्थ्य संचारकों के लिए यह पारदर्शिता और सही दर्शक-चयन का समर्थन करता है; उपभोक्ताओं के लिए यह याद दिलाता है कि परिचय और महसूस की गई विश्वसनीयता भी उन विकल्पों में शामिल होती है जो पूरी तरह निजी लगते हैं।
मुख्य बिंदु
- अध्ययन ने 18 से 65 वर्ष के 506 हंगरी निवासी वयस्कों के उत्तरों का विश्लेषण किया।
- मानी गई विश्वसनीयता खरीद से जुड़ा सबसे मजबूत प्रभावकारी घटक थी।
- सर्वेक्षण के संबंध यह सिद्ध नहीं करते कि इन्फ्लुएंसर ने खरीद कराई।

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