वैज्ञानिकों पर भरोसा इस धारणा से जुड़ा है कि वे हमारे पक्ष में हैं
ब्रिटेन के 4,262 वयस्कों के सर्वेक्षण में अधिकांश लोगों ने वैज्ञानिकों पर भरोसा जताया, लेकिन महसूस किए गए अपनत्व, पारदर्शिता और राजनीतिक पहचान के साथ स्पष्ट अंतर मिले।

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क्या यह जानना कि कोई अपने विषय का विशेषज्ञ है, उस पर भरोसा करने के लिए पर्याप्त है? King's College London के Policy Institute और Sense about Science संगठन के सर्वेक्षण ने जाँचा कि वैज्ञानिकों पर भरोसा उनकी समझी जाने वाली दक्षता, पारदर्शिता और इस भावना से कैसे जुड़ता है कि शोध उत्तरदाता जैसे लोगों को लाभ पहुँचाता है। Wellcome द्वारा वित्तपोषित और 9 सितंबर को जारी रिपोर्ट विज्ञान और सामाजिक जुड़ाव के संबंध की पड़ताल करती है।
टीम ने YouGov के ऑनलाइन पैनल के माध्यम से 8 से 11 मई 2026 के बीच 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 4,262 वयस्कों का सर्वेक्षण किया। हर प्रतिभागी ने वैज्ञानिकों के अलग-अलग समूहों पर अपने भरोसे को शून्य से दस अंक दिए। रिपोर्ट सात से दस अंकों को उच्च, चार से छह को मध्यम और शून्य से तीन को कम भरोसा मानती है; ‘पता नहीं’ वाले उत्तर अलग रखे जाते हैं। ये तुलनाएँ व्यक्त की गई राय बताती हैं, वैज्ञानिक ज्ञान की परीक्षा के परिणाम नहीं।
कुल मिलाकर, 63% ने सामान्य रूप से वैज्ञानिकों पर उच्च भरोसा और 5% ने कम भरोसा जताया। विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के लिए उच्च भरोसे का अनुपात 61%, सरकारी वैज्ञानिकों के लिए 42% और निजी कंपनियों के वैज्ञानिकों के लिए 34% था। इन श्रेणियों का मूल्यांकन अलग-अलग हुआ: प्रतिशत वैज्ञानिकों को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग समूहों में नहीं बाँटते और न ही हर संस्था के काम की वास्तविक गुणवत्ता मापते हैं।
महसूस किए गए अपनत्व ने उत्तरदाताओं के समूहों को स्पष्ट रूप से अलग किया। उच्च भरोसे वाले 2,817 प्रतिभागियों में 68% इस बात से सहमत थे कि वैज्ञानिक उनके जैसे लोगों के पक्ष में हैं। मध्यम भरोसे वाले 1,107 लोगों में यह सहमति 22% और कम भरोसे वाले 206 लोगों में 7% थी। रिपोर्ट के प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने के लिए भारित हैं; इन गिनतियों के साधारण अनुपात से उन्हें दोबारा नहीं निकालना चाहिए। पारदर्शिता में भी ऐसा ही अंतर था: उच्च भरोसे वाले समूह में 73% वैज्ञानिकों को खुला और पारदर्शी मानते थे, जबकि मध्यम समूह में 28% और कम भरोसे वाले समूह में 10% ऐसा मानते थे।
राजनीतिक पहचान के साथ भी धारणा में अंतर दिखाई दिया। Reform UK को वोट देने का इरादा रखने वालों में 32% वैज्ञानिकों को अपने पक्ष में मानते थे, जबकि ग्रीन पार्टी को वोट देने का इरादा रखने वालों में यह अनुपात 71% था—39 प्रतिशत अंकों का अंतर। इन दोनों समूहों में क्रमशः 778 और 626 प्रतिभागी थे। 11 सितंबर को Nature में प्रकाशित क्रिस सिम्स की रिपोर्ट अध्ययन के एक प्रमुख बॉबी डफी की व्याख्या पर जोर देती है: भरोसे में यह धारणा शामिल है कि वैज्ञानिक किसके लिए काम करते हैं। उत्तर एक ही अवधि में लिए गए थे, इसलिए संबंध यह तय नहीं करता कि राजनीतिक पहचान ने भरोसे को आकार दिया, इसका उलटा हुआ, या दूसरे कारकों ने दोनों को प्रभावित किया।
वैज्ञानिक संस्थाओं के लिए परिणाम संकेत देता है कि अपनी योग्यताएँ बताना विश्वसनीयता दिखाने का पूरा काम नहीं है। हितों को स्पष्ट करना, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और यह बताना कि शोध से किसे लाभ हो सकता है, देखी गई धारणाओं से मेल खाते रास्ते हैं। सर्वेक्षण ने इन हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता नहीं जाँची। अगला सवाल यह है कि कौन-सी कार्यप्रणालियाँ राजनीतिक सहमति माँगे बिना और प्रमाणों की आलोचनात्मक जाँच को समूह-निष्ठा से बदले बिना भरोसे के स्थायी संबंध बनाती हैं।
मुख्य बिंदु
- ब्रिटिश सर्वेक्षण में 63% ने सामान्य रूप से वैज्ञानिकों पर उच्च भरोसा और 5% ने कम भरोसा जताया।
- वैज्ञानिकों को अपने करीब और पारदर्शी मानना भरोसे से जुड़ा था; आँकड़े कारण-परिणाम स्थापित नहीं करते।
- देखे गए राजनीतिक अंतर अकेले यह नहीं बताते कि किन कदमों से भरोसा बढ़ेगा या यह पैटर्न दूसरे देशों में कैसे लागू होता है।

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