Science to Supersize Understanding

सही उत्तर वाली संरचना को अनुकूल बनाकर डीएनए कंप्यूटर ने 25-बिट की दो संख्याएँ जोड़ीं

डीएनए के छोटे टुकड़े लंबी शृंखला पर जगह पाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं; सबसे स्थिर जमावट परिणाम दर्शाती है, लेकिन चिप के मुकाबले ऊर्जा बचत सिद्ध नहीं हुई है।

Esquema ilustrativo de pares de bases A-T e C-G em uma dupla hélice de DNA; não representa o computador experimental.
चित्र: Darryl Leja/NHGRI-NIH, esquema ilustrativo de DNA (não é imagem do experimento); arquivo corrigido em 2024, sem adaptação. Domínio público nos EUA.

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SUPER SCI-Z संपादकीय विश्लेषण

गणना को इस तरह अणुओं में दर्ज किया जा सकता है कि उनकी सबसे स्थिर जमावट उत्तर के अनुरूप हो। 16 सितंबर को Nature में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने डीएनए से बना कंप्यूटर दिखाया, जिसने दस प्रोग्राम चलाए। इनमें 25-बिट की दो संख्याओं का जोड़ भी था। शोधकर्ता इसे 100-बिट की गणना कहते हैं, क्योंकि इसमें 50 इनपुट बिट, स्थानों के बीच 25 कैरी बिट और 25 आउटपुट बिट गिने जाते हैं; इसका अर्थ 100-बिट की दो संख्याएँ जोड़ना नहीं है।

इस व्यवस्था में डीएनए की एक लंबी शृंखला आधार का काम करती है, जिससे छोटे टुकड़े निश्चित स्थानों पर जुड़ते हैं। उपलब्ध टुकड़ों का चुनाव प्रोग्राम और इनपुट तय करता है। हर टुकड़ा पड़ोसियों से भी जुड़ता है: मेल खाने वाले संयोजन अधिक स्थिर रहते हैं, जबकि गलत मेल वाला टुकड़ा अलग होकर बदला जा सकता है। अणुओं के ये चुनाव गणना के तार्किक चरणों को दर्शाते हैं और अनुकूल बनी संरचना में उत्तर दर्ज होता है।

ट्रिस्टन स्टेरिन, अबीर एशरा और सहयोगियों ने सम-विषमता जाँच—आठ द्विआधारी अंकों में 1 की संख्या सम है या विषम—से लेकर गुणा और भाग तक की जाँच की। उन्होंने प्रतिदीप्त संकेतों से नतीजे पढ़े और ज्ञात उत्तर वाले नियंत्रण नमूनों से तुलना की। छोटी व्यवस्थाओं में लगभग एक मिनट की ठंडा करने की प्रक्रिया के बाद अलग-अलग उत्तर पहचाने जा सके। एक सरल प्रोग्राम में इनपुट बार-बार बदलने पर 25 बदलावों तक संकेत अलग पहचाने जा सके।

बड़े जोड़ के लिए आधार पर 25 स्थान चाहिए थे और समय बहुत अधिक लगा: कुछ स्थितियों में पढ़ने में लगभग एक घंटा, जबकि अधिक कठिन विन्यास में करीब 14 घंटे लगे। टीम को डीएनए के टुकड़े तैयार करने और मिश्रण को गर्म व ठंडा करने की भी जरूरत पड़ी। ऊष्मागतिक तर्क सिर्फ इतना है कि जुड़ने की प्रक्रिया में सही उत्तर वाली अवस्था को ऊर्जा की दृष्टि से अनुकूल बनाया गया। अध्ययन ने इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर से बिजली की खपत की तुलना नहीं मापी।

इस काम ने पुनः प्रोग्राम किए जा सकने वाले मंच पर दिखाया कि अणुओं के बीच उलट सकने वाली प्रतिस्पर्धा से कई प्रकार की गणनाएँ हो सकती हैं, बिना हर टुकड़े के लिए चरणों का कठोर क्रम तय किए। व्यावहारिक उपयोग के लिए आकार, गति और कुल ऊर्जा खर्च की जाँच बाकी है। फिलहाल यह रासायनिक परिपथ बनाने का एक रास्ता है, सिलिकॉन प्रोसेसर का विकल्प नहीं।

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मुख्य बिंदु

  • दस प्रोग्राम चलाए गए; 25-बिट की दो संख्याओं के जोड़ में इनपुट, कैरी और आउटपुट मिलाकर 100 बिट गिने गए।
  • डीएनए के टुकड़े लंबे आधार पर प्रतिस्पर्धा करते हैं; पड़ोसी टुकड़ों का स्थिर जुड़ाव उत्तर वाली संरचना को अनुकूल बनाता है।
  • छोटी गणना करीब एक मिनट में पढ़ी गई, लेकिन बड़ा जोड़ घंटों चला; कुल ऊर्जा की तुलना चिप से नहीं हुई।
मुख्य स्रोतNature

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