Science to Supersize Understanding

चंद्रा ने कम खंगाली गई ऊर्जा पट्टी में 84 एक्स-रे स्रोत पहचाने

छह आकाशगंगाओं की खोज में ऐसे स्रोत मिले जिनका एक्स-रे उत्सर्जन बहुत कम ऊर्जा पर केंद्रित है। इस वर्ग में अलग-अलग तरह की तारकीय प्रणालियाँ हो सकती हैं।

Imagem composta da galáxia M101, uma das seis estudadas, com raios X do Chandra em roxo e luz visível do Hubble.
चित्र: X-ray: NASA/CXC/Univ. of Alabama/M. Muhibullah et al.; Optical: NASA/ESA/STScI; Image Processing: NASA/CXC/SAO/N. Wolk

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SUPER SCI-Z संपादकीय विश्लेषण

कितने चमकीले पिंड किसी सर्वेक्षण से इसलिए छूट जाते हैं क्योंकि वे उसी ऊर्जा पट्टी में विकिरण छोड़ते हैं जिसे सर्वेक्षण देखता ही नहीं? इसी सवाल ने चंद्रा अंतरिक्ष वेधशाला के अभिलेखों के नए विश्लेषण को दिशा दी। और दूर देखने के बजाय मुस्तफा मुहिबुल्लाह और अलबामा विश्वविद्यालय तथा हार्वर्ड एवं स्मिथसोनियन खगोलभौतिकी केंद्र के उनके सहयोगियों ने छह निकटवर्ती आकाशगंगाओं के पुराने प्रेक्षण दोबारा जाँचे। उन्होंने खोज के लिए चुनी गई ऊर्जा सीमा बदल दी। अध्ययन 9 सितंबर को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुआ।

शोधकर्ताओं ने ऐसे बिंदु चुने जो 0.15 से 0.3 किलोइलेक्ट्रॉन-वोल्ट के बीच दिखाई देते थे, लेकिन 0.3 से अधिक ऊर्जा पर सांख्यिकीय रूप से स्पष्ट संकेत नहीं देते थे। किलोइलेक्ट्रॉन-वोल्ट प्रकाश के हर कण की ऊर्जा बताने वाली इकाई है। एक्स-रे सर्वेक्षणों में प्रायः 0.3 को निचली सीमा माना जाता है। टीम ने एक ही क्षेत्र की अलग-अलग ऊर्जा पट्टियों वाली छवियों की तुलना की, 2017 तक लिए गए पुराने प्रेक्षणों को जोड़ा और संभावित स्रोतों को आँखों से भी जाँचा। पुराने रिकॉर्ड चुनने से मिशन के शुरुआती वर्षों में इन ऊर्जाओं के प्रति उपकरण की अधिक संवेदनशीलता का लाभ मिला।

छँटाई के बाद 84 स्रोत बचे, प्रत्येक आकाशगंगा में सात से 21। जब निचली सीमा 0.15 से बढ़ाकर 0.2 किलोइलेक्ट्रॉन-वोल्ट की गई, जहाँ डिटेक्टर अधिक भरोसेमंद है, तब भी 84 में से 81 स्रोत दिखे। आकाशगंगाओं से बाहर के 16 तुलना क्षेत्रों में लेखकों को दो ऐसे संभावित स्रोत मिले। इस नियंत्रण के आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया कि अध्ययन वाली आकाशगंगाओं से असंबंधित पिंडों का नमूने में मिश्रण लगभग 3% से कम है। इसलिए यह आबादी केवल शोर या सामने मौजूद स्रोतों को चुन लेने का नतीजा नहीं लगती।

इनका नाम हाइपरसॉफ्ट, यानी अत्यंत कम ऊर्जा वाले एक्स-रे स्रोत, दर्ज किए गए विकिरण की असाधारण रूप से कम ऊर्जा को दर्शाता है। सबसे चमकीले पिंड केवल जाँची गई संकरी पट्टी में करीब 10³⁸ अर्ग प्रति सेकंड, अर्थात लगभग 10³¹ वाट, विकिरण शक्ति छोड़ते हैं। इन अनुमानों में हम तक पहुँचने के रास्ते में विकिरण के अवशोषण का सुधार किया गया है और सभी दिशाओं में समान उत्सर्जन माना गया है। उत्सर्जन मॉडल संकेत देते हैं कि ऊर्जा का और भी बड़ा हिस्सा चरम पराबैंगनी विकिरण के रूप में निकल सकता है, जिसे तारों के बीच की गैस आसानी से सोख लेती है। यह कुल शक्ति मॉडल से निकाला गया अनुमान है, पराबैंगनी विकिरण का प्रत्यक्ष मापन नहीं।

संकेत हैं कि नमूने के कुछ स्रोतों में श्वेत बौने हैं—तारों के सघन अवशेष, जो किसी साथी तारे से पदार्थ प्राप्त कर सकते हैं। एंड्रोमेडा के केंद्रीय क्षेत्र में चुने गए 18 स्रोतों में कम-से-कम सात उन प्रणालियों की स्थिति से मेल खाते हैं जिनमें नोवा विस्फोट पहले दर्ज हो चुके हैं। ऐसे विस्फोटों में सतह पर होने वाला नाभिकीय दहन अवशेष को गर्म रख सकता है। अन्य स्रोतों के लिए लेखक ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारे वाली प्रणालियों पर विचार करते हैं। इस तरह एक ही विकिरण स्वरूप के पीछे अलग-अलग भौतिक प्रक्रियाएँ हो सकती हैं।

स्रोतों की प्रकृति पहचानने पर यह जाँचना संभव होगा कि क्या कुछ स्रोत टाइप Ia सुपरनोवा के पूर्ववर्ती हैं—ऐसे विस्फोट जो श्वेत बौनों को नष्ट कर देते हैं। इससे यह भी आँका जा सकेगा कि इन स्रोतों के प्रकाशकण आकाशगंगाओं की गैस से इलेक्ट्रॉन निकालने में कितना योगदान देते हैं। सर्वेक्षण ने अब इन प्रश्नों की जाँच के लिए एक ठोस नमूना दिया है। उसने यह भी दिखाया है कि किसी आकाशगंगा की सूची में कौन-से पिंड आते हैं, यह कुछ हद तक इस पर निर्भर हो सकता है कि प्रेक्षण की सीमा कहाँ रखी गई है।

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मुख्य बिंदु

  • कम खंगाली गई ऊर्जा पट्टी की खोज में छह निकटवर्ती आकाशगंगाओं में 84 स्रोत मिले।
  • हाइपरसॉफ्ट स्रोतों की विकिरण पहचान समान है, लेकिन उनकी भौतिक उत्पत्ति अलग हो सकती है।
  • उनका कुल पराबैंगनी उत्सर्जन और आकाशगंगाओं के विकास में उनकी भूमिका अभी निर्धारित की जानी है।
मुख्य स्रोतNature Astronomy

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