हर सांस के साथ मस्तिष्क तरंगों का आकार बदलता दिखा
16 लोगों की अंतःकपालीय रिकॉर्डिंग में हर सांस और तंत्रिका दोलन के आकार का चक्र-दर-चक्र संबंध मिला, पर कारण या दौरे की भविष्यवाणी स्थापित नहीं हुई।

मस्तिष्क में सांस एक समान मेट्रोनोम की तरह काम नहीं करती। 16 लोगों की रिकॉर्डिंग में हर श्वास और उच्छ्वास की अवधि, विषमता और अन्य विशेषताएं तंत्रिका दोलनों के आकार में बदलाव के साथ चलीं; तंत्रिका दोलन न्यूरॉन समूहों की विद्युत गतिविधि में लयबद्ध उतार-चढ़ाव हैं। केंद्रीय निष्कर्ष सांसों की प्रति मिनट संख्या से कहीं सूक्ष्म समय-संबंध है, लेकिन यह नहीं दिखाता कि सांस का आकार संबंधित मस्तिष्क तरंग का कारण है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो (UC San Diego) की Eena Kosik-Rose ने Bradley Voytek और सहयोगियों के साथ Journal of Neuroscience में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व किया। UC San Diego Today की संस्थागत रिपोर्ट Christine Clark ने लिखी; Medical Xpress में विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया लेख Sadie Harley ने संपादित और Robert Egan ने समीक्षित किया। दल ने अंतःकपालीय इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी के तीन डेटा समूह जांचे; यह मस्तिष्क में लगाए इलेक्ट्रोड से विद्युत गतिविधि दर्ज करने वाली आक्रामक तकनीक है, जिसका डेटा उपचार-प्रतिरोधी मिर्गी की चिकित्सकीय निगरानी से मिला।
शोधकर्ताओं ने हर सांस में नाक का वायु प्रवाह और छाती-पेट की गति को स्थानीय क्षेत्र विभव से मिलाया; स्थानीय क्षेत्र विभव इलेक्ट्रोड के पास न्यूरॉनों का समेकित विद्युत संकेत है। भावना और स्मृति सहित कई कार्यों से जुड़े लिम्बिक क्षेत्रों तथा कॉर्टेक्स में श्वसन-तरंग और तंत्रिका-चक्र के आकार का युग्मन मिला। विधि उन भेदों को पकड़ती है जिन्हें प्रति मिनट सांस का औसत मिटा देता है। फिर भी प्रतिभागी आम आबादी का नमूना नहीं हैं और इलेक्ट्रोड का स्थान चिकित्सकीय आवश्यकता से तय था।
लेखक भविष्य में मिर्गी में अचानक अप्रत्याशित मृत्यु, जिसमें मिर्गी वाला व्यक्ति बिना तत्काल स्पष्ट कारण मरता है, और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम, यानी नींद में शिशु की अस्पष्ट मृत्यु, के अध्ययन की दिशा देखते हैं। मौजूदा अध्ययन किसी स्थिति के लिए चेतावनी, जैवचिह्न या उपचार नहीं देता। प्रमाण आक्रामक निगरानी वाले रोगियों में सांस और तंत्रिका गतिविधि का सूक्ष्म युग्मन समर्थन करते हैं; कारण, निदान या सांस से मस्तिष्क के व्यापक स्वैच्छिक नियंत्रण का नहीं। महत्व औसतों में छिपे शरीर–मस्तिष्क संबंध का है; निर्णायक अनिश्चितता यह है कि क्या इसे स्वस्थ लोगों और चिकित्सकीय घटनाओं में गैर-आक्रामक रूप से दोहराया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
- अध्ययन ने मिर्गी वाले 16 लोगों में सांस और मस्तिष्क गतिविधि की तुलना की।
- हर सांस का आकार तंत्रिका दोलनों के आकार से जुड़ा मिला।
- निष्कर्ष कारण या अचानक मृत्यु और दौरे की भविष्यवाणी सिद्ध नहीं करता।
