बेपीकोलंबो ने क्रूज़ मॉड्यूल छोड़ा और बुध पर आगमन शुरू किया
पृथ्वी से 20 करोड़ किलोमीटर से अधिक दूरी पर पुष्ट हुआ अलगाव कक्षा तक पहुँचने और दो वैज्ञानिक यानों के संचालन की क्रमिक प्रक्रिया शुरू करता है।

सूर्य के पास, कम गुरुत्व वाले छोटे ग्रह के सामने किसी अंतरिक्ष यान को धीमा कैसे किया जाए? यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान की JAXA की साझेदारी वाला बेपीकोलंबो मिशन अपने अंतिम चरण में इसी परिचालन समस्या का सामना कर रहा है। अक्टूबर 2018 में प्रक्षेपित मिशन ने अरबों किलोमीटर की यात्रा की और बुध तक पहुँचने से पहले गति तथा मार्ग धीरे-धीरे बदलने के लिए नौ ग्रहीय फ्लाइबाइ किए।
3 सितंबर को टीम ने क्रूज़ के दौरान प्रणोदन देने वाले मर्करी ट्रांसफर मॉड्यूल को दो वैज्ञानिक ऑर्बिटर वाले यान-समूह से अलग करके आगमन चरण शुरू किया। प्रक्रिया स्वायत्त होनी थी, क्योंकि 20 करोड़ किलोमीटर से अधिक दूरी पर मनुष्य वास्तविक समय में सुधार नहीं कर सकते थे। चार यांत्रिक जोड़ काटे गए और स्प्रिंग तंत्रों ने मॉड्यूल को लगभग 40 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से धीरे-धीरे दूर धकेला।
स्पेन के सेब्रेरोस और अर्जेंटीना के मालार्गुए स्थित ESA के डीप-स्पेस स्टेशनों ने पहले वेग बदलने से पैदा हुआ अपेक्षित रेडियो-आवृत्ति परिवर्तन पकड़ा। फिर उन्हें मर्करी प्लैनेटरी ऑर्बिटर, यानी MPO, की टेलीमेट्री मिली। मध्य यूरोपीय ग्रीष्मकालीन समय 15:52 पर एजेंसी ने सफल अलगाव, सभी प्रणालियों की सामान्य स्थिति और बैटरियाँ चार्ज करते सौर पैनलों की पुष्टि की।
अलगाव ने यानों को तुरंत वैज्ञानिक कक्षाओं में नहीं पहुँचाया। MPO, 21 नवंबर को निर्धारित बुध-कक्षा में पकड़ तक यान-समूह को ऊर्जा देता रहेगा। 9–10 दिसंबर को उसे जापानी Mio ऑर्बिटर छोड़ना है; इसके बाद दोनों यानों की जाँच और कक्षा समायोजन होंगे। वैज्ञानिक चरण अप्रैल 2027 के लिए नियोजित है, जब 16 उपकरण ग्रह की सतह, आंतरिक भाग, चुंबकीय क्षेत्र और अंतरिक्षीय परिवेश का अध्ययन करेंगे।
Phys.org पर प्रकाशित AFP की रिपोर्ट परिचालन संदर्भ जोड़ती है: पुष्टि का संकेत नियंत्रण केंद्र तक पहुँचने में लगभग दो घंटे लगा, जबकि आदेशों और जाँचों में हर दिशा में करीब 30 मिनट की देरी थी। रिपोर्ट और ESA का अभिलेख एक ही घटना को अलग भूमिकाओं से बताते हैं—ESA टेलीमेट्री का आधिकारिक दस्तावेज देता है, जबकि रिपोर्ट समझाती है कि दूरी धीमे अलगाव को भी उच्च जोखिम वाला अभियान क्यों बना देती है।
सितंबर की उपलब्धि ने आगमन का केवल पहला प्रश्न हल किया: क्रूज़ मॉड्यूल अलग हुआ और दोनों ऑर्बिटर अपेक्षा के अनुसार चलते रहे। कक्षा में पकड़, Mio का अलगाव और कमीशनिंग अभी बाकी हैं। यदि ये चरण सफल रहे, तो बेपीकोलंबो पूरक कक्षाओं में दो यानों से बुध को एक साथ देखने वाला पहला मिशन होगा, जिससे ग्रह का निकट अध्ययन और उसके चुंबकमंडल की जाँच अलग-अलग की जा सकेगी।
मुख्य बिंदु
- ESA ने 3 सितंबर को ट्रांसफर मॉड्यूल के सफल अलगाव की पुष्टि की।
- संयुक्त यान को 21 नवंबर 2026 को बुध की कक्षा में प्रवेश करना है।
- MPO और Mio के साथ वैज्ञानिक चरण अप्रैल 2027 में शुरू करने की योजना है।

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