Science to Supersize Understanding

कुछ पक्षियों की पुकार इतनी दूर तक क्यों पहुंचती है?

123 प्रजातियों के मापन में तेज़ आवाज़ का संबंध बड़े शरीर और चोंच के फैलाव से मिला, पर विकासवादी कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

Seriema fotografada no Parque Estadual Paulo César Vinha, em Guarapari, Espírito Santo.
चित्र: Leonardo Merçon / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

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SUPER SCI-Z संपादकीय विश्लेषण

जेफ पोडोस और जोआओ सी. टी. मेनेज़ेस ने 123 पक्षी प्रजातियों की अधिकतम आवाज़ तीव्रता मापी। इनमें 113 के लिए पहले तुलनीय रिकॉर्ड नहीं थे। नंगी-गर्दन वाली बेलबर्ड और लाल-पैर वाली सेरिएमा विशेष रूप से तेज़ पुकार वाली संभावित प्रजातियों में शामिल हुईं।

अलग-अलग दूरी पर रिकॉर्ड ध्वनियों की तुलना के लिए शोधकर्ताओं ने ध्वनि-मापक और लेज़र दूरी-मापक साथ इस्तेमाल किए। अध्ययन ने मान एक मीटर पर मानकीकृत किए: प्रजातियों के बीच तीव्रता 64 से 122 डेसीबल तक थी। यह संख्या मैदान में किसी श्रोता को सुनाई देने वाली आवाज़ के बराबर नहीं होती।

टीम को अधिक तीव्र पुकार, बड़े शरीर और चोंच के चौड़े खुलाव के बीच संबंध मिला। शरीर की बनावट तेज़ ध्वनि बनाने या फैलाने में मदद कर सकती है, लेकिन तुलना सटीक प्रक्रिया सिद्ध नहीं करती और न ही इन लक्षणों को अकेला कारण बताती है।

आंकड़ों ने कमजोर उड़ान, घने आवास या प्रजनन व्यवस्था से जुड़ी परिकल्पनाओं का स्पष्ट समर्थन नहीं किया। अध्ययन शारीरिक लक्षणों और तीव्रता का संबंध बताता है, लेकिन यह नहीं समझाता कि कुछ प्रजातियों में विकास ने इतनी ऊँची पुकार को क्यों बढ़ावा दिया।

Podos और Menezes का अध्ययन Evolution में प्रकाशित हुआ; मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय एमहर्स्ट की संस्थागत खबर Daegan Miller ने लिखी। परिणाम मापन बढ़ाते हैं, पर सार्वभौमिक रिकॉर्ड स्थापित नहीं करते और न ही पुकार की पारिस्थितिक भूमिका तय करते हैं।

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मुख्य बिंदु

  • अध्ययन में 123 प्रजातियां थीं; 113 के पुराने तुलनीय मापन नहीं थे।
  • एक मीटर पर मानकीकृत तीव्रता 64 से 122 डेसीबल तक थी।
  • शरीर और चोंच का संबंध मिला, पर विकासवादी भूमिका अब भी अनिश्चित है।
मुख्य स्रोतEvolution e University of Massachusetts Amherst

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